सामान्य निर्देश

1 " अनुसंधान शताब्दी" अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ई-शोध पत्रिका अर्द्ध-वार्षिकी पत्रिका है।
     इस शोध-पत्रिका में हम कला, साहित्य, समाज, भाषा, राजनीति, विभिन्‍न शास्त्रों और संस्कृति के क्षेत्र के शोधार्थियों और अध्येताओं के शोध एवं अनुसंधानात्मक
     गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रकाशित की जा रही है।
2 शोध-पत्रिका अपने वेबसाइट पर ही पढ़ी जायेगी। इसके सभी शोध-पत्रों को पी.डी.एफ़. फॉर्म में अपलोड किया जायेगा, जिसके माध्यम से पुरे विश्व में यह पढ़ी जायेगी।
3 हमें उम्मीद है कि कला, साहित्य, समाज, भाषा, राजनीति, विभिन्‍न शास्त्रों और संस्कृति के अनुसंधिस्तुओं एवं विषय-विशेषज्ञों का सृजनात्मक सहयोग हमें लगातार प्राप्त होता रहेगा।
4 जो भी शोधार्थी अथवा अध्येता इस शोध-पत्रिका में अपना शोध-पत्र भेजना चाहते हैं, वे कृपया अपना शोध-पत्र पेजमेंकर/एम.एस वर्ड में ISM में DVB-TT-SUREKH में 14 साइज़ में टंकित करके ई-मेल कर दें।
5 शोध-पत्र लिखते समय संदर्भों का स्पष्ट उल्लेख करें. पुस्तक का संदर्भ, पत्र-पत्रिका का सन्दर्भ, प्रकाशन वर्ष एवं संस्करण का अंकित होना अनिवार्य है।
6 शोध-पत्र पूर्ण रूप से मौलिक होना चाहिए, जिसका घोषणा-पत्र संलग्न होना चाहिए अन्यथा पत्र पर कोई गौर नहीं किया जायेगा।
7 शोध-पत्रों का प्रकाशन पूरी तरह से संपादन मंडल पर निर्भर है. संपादन-परिषद् के संतुष्ट होने पर ही शोध-पत्र प्रकाशित किया जायेगा।
8 शोध-पत्रों की दो प्रतियाँ (हार्ड कॉपी) पोस्ट से जरुर भेजें. इसके साथ ही लेखक एक घोषणा-पत्र भी संलग्न करें जिसमें यह लिखा हो की यह शोध-पत्र पहले कही प्रकाशित नहीं हुआ है।
9 शोध-पत्र के आरम्भ में शोध-सारांश (अधिकतम 100 शब्द) तथा अंत में निष्कर्ष अवश्य लिखें.
10 समस्त शोध-पत्रों का सर्वाधिकार प्रधान-सम्पादक के पास सुरक्षित है।
11 पत्रिका में प्रकाशित सभी शोध-पत्र के पुनर्प्रकाशन के लिए प्रधान-सम्पादक से अनुमति लेना आवश्यक होगा।
12 कृपया ध्यान दे कि शोध-पत्रिका का संपादन, संचालन एवं प्रकाशन पूर्णत: अव्यवसायिक है।
13 समस्त विवादों का न्याय क्षेत्र बीड महाराष्ट्र है।
14 शोध-पत्रिका में प्रकाशित सभी पत्रों के विचार लेखकों के अपने हैं। इससे संपादन-मंडल का सहमत होना अनिवार्य नहीं है।